ये चमत्कार श्रीमद-भागवतम, दसवें कांड में वर्णित किए गए हैं:
विविधा-गोपा-चरणेषु विदग्धो
वेणु-वाद्या उरुधा निजा-शिक्षाः
तव सुतः सति यदाधरा-बिम्बे
दत्त-वेणुर अनयत् स्वर-जातीः
सवनशस तद उपधार्य सुरेशाः
शक्र-शर्व-परमेष्ठि-पुरोगाः
कवया आनत-कंधर-चित्ताः
कश्मलं ययुः अनिश्चित-तत्त्वाः
"हे पवित्र माता यशोदा, तुम्हारा पुत्र, जो गायों को पालने की सभी कलाओं में निपुण है, ने बाँसुरी बजाने की कई नई शैलियों का आविष्कार किया है। जब वे अपनी बाँसुरी अपने बिम्बा-लाल होंठों पर ले जाते हैं और सामंजस्यपूर्ण धुनों में हार्मोनिक पैमाने के स्वर भेजते हैं, ब्रह्मा, शिव, इंद्र और अन्य मुख्य देवता उस ध्वनि को सुनकर भ्रमित हो जाते हैं। यद्यपि वे सबसे अधिक विद्वान अधिकारी हैं, वे उस संगीत के सार का पता नहीं लगा सकते हैं, और इसलिए वे अपने सिर और हृदय झुकाते हैं।" (भागवतम् 10.35.14-15)
