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श्लोक 1.6.80  |
अवधान-प्रसादो ’त्र
क्रियतां ज्ञापयामि यत्
पश्चाद् विचार्य कर्तव्यं
स्वयम् एव यथोचितम् |
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| अनुवाद |
| कृपया मुझ पर अपना ध्यान दीजिए। मैं जो कहने जा रहा हूँ, उस पर विचार कीजिए और फिर जैसा उचित समझिए, वैसा कीजिए। |
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| Please pay attention to me. Consider what I'm about to say and then do as you see fit. |
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