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श्लोक 1.6.41  |
तदानीम् अपि नामीषां
किञ्चित् त्वत्-प्रभुणा कृतम्
इदानीं साधित-स्वार्थो
यच् चक्रे ’यं क्व वच्मि तत् |
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| अनुवाद |
| फिर भी तुम्हारे प्रभु ने उनकी सहायता के लिए कुछ नहीं किया। और अब कौन यह सुन सकता है कि वह अपने अन्य भक्तों के लिए क्या कर रहा है? |
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| Yet your Lord did nothing to help them. And who can now hear what He is doing for His other devotees? |
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