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श्लोक 1.6.24  |
इदानीं यद् व्रजे गत्वा
किम् अप्य् अन्वभवं ततः
महा-सौभाग्य-मानो मे
स सद्यश् चूर्णतां गतः |
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| अनुवाद |
| हाल ही में व्रज की यात्रा के दौरान मैंने जो कुछ देखा, उससे मेरे सौभाग्य पर मेरा गर्व चूर-चूर हो गया। |
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| What I saw during my recent visit to Vraj shattered my pride in my good fortune. |
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