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श्लोक 1.6.103  |
श्री-रोहिण्य् उवाच
आः कंस-मातः किम् अयं
गो-रक्षायां नियुज्यते
क्षण-मात्रं च तत्रत्यैर्
अदृष्टे ’स्मिन् न जीव्यते |
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| अनुवाद |
| श्री रोहिणी बोलीं: हे कंस की माता, क्या वे उसे केवल गौ-पालन में ही लगा देंगे? जब तक वहाँ के भक्तगण उसे देख न लें, वे एक क्षण भी जीवित नहीं रह सकते! |
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| Sri Rohini said: O mother of Kansa, will he devote him only to cow-rearing? He cannot live even for a moment until the devotees there see him! |
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