श्री बृहत् भागवतामृत  »  खण्ड 1: प्रथम-खण्ड: श्री भगवत कृपा सार निधार  »  अध्याय 5: प्रिय (प्रिय भक्त)  »  श्लोक 87
 
 
श्लोक  1.5.87 
अतो ’त्र तस्यागमने
’प्य् आशा मे ’पगता बत
मन्ये ’धुनात्मनः शीघ्र-
मरणं तद्-अनुग्रहम्
 
 
अनुवाद
इसलिए मैंने उम्मीद छोड़ दी है कि वह कभी वापस आएगा। अब मुझे लगता है कि उसकी असली दया मेरी जल्द मौत होगी।
 
So I've given up hope that he'll ever come back. Now I think his only real mercy would be my early death.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)