श्री बृहत् भागवतामृत  »  खण्ड 1: प्रथम-खण्ड: श्री भगवत कृपा सार निधार  »  अध्याय 5: प्रिय (प्रिय भक्त)  »  श्लोक 61
 
 
श्लोक  1.5.61 
श्री-भगवान् अर्जुन उवाच
भवत्-प्रियतमेशेन
भगवन्न् अमुना कृतः
कृपा-भरो ’पि दुःखाय
किलास्माकं बभूव सः
 
 
अनुवाद
अर्जुन बोले: हे देवराज! आपके प्रिय भगवान ने हम पर जो महान कृपा की थी, वही वास्तव में हमारे दुःख का कारण बन गयी है।
 
Arjuna said: O King of the Devas, the great mercy that your beloved Lord had bestowed upon us has actually become the cause of our sorrow.
तात्पर्य
कृष्ण के साथ अर्जुन का रिश्ता भीम से कहीं ज़्यादा नज़दीकी था। जहाँ भीम कृष्ण की दयालुता को उनके लीलाओं के दूसरे लक्ष्य की एक दिखावा मानकर खारिज कर देता था, वहीं अर्जुन ने यह स्वीकार किया कि पाण्डवों के प्रति कृष्ण का स्नेह सच्चा था। अर्जुन के अनुसार, जब वह अर्जुन के रथ को हाँकते थे और अलग-अलग तरीकों से पाण्डवों की सेवा करते थे, तब उनके इरादे निःस्वार्थ थे, लेकिन फिर भी परिणाम हमेशा इसके उलट होते थे।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)