श्री बृहत् भागवतामृत  »  खण्ड 1: प्रथम-खण्ड: श्री भगवत कृपा सार निधार  »  अध्याय 5: प्रिय (प्रिय भक्त)  »  श्लोक 44
 
 
श्लोक  1.5.44 
धार्ष्ट्यं ममाहो भवतां गुणान् किल
ज्ञातुं च वक्तुं प्रभवेत् स एकलः
निर्णीतम् एतत् तु मया महा-प्रभुः
सो ’त्रावतीर्णो भवतां कृते परम्
 
 
अनुवाद
मेरा अहंकार तो देखो! केवल कृष्ण ही तुम्हारे गुणों को भली-भाँति जान और वर्णित कर सकते हैं। पर कम से कम मुझे तो यह विश्वास है कि परम भगवान् इस जगत में तुम्हारे लिए ही अवतरित हुए हैं।
 
Look at my ego! Only Krishna can truly know and describe your qualities. But at least I believe that the Supreme Lord has descended into this world for you.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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