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श्लोक 1.5.44  |
धार्ष्ट्यं ममाहो भवतां गुणान् किल
ज्ञातुं च वक्तुं प्रभवेत् स एकलः
निर्णीतम् एतत् तु मया महा-प्रभुः
सो ’त्रावतीर्णो भवतां कृते परम् |
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| अनुवाद |
| मेरा अहंकार तो देखो! केवल कृष्ण ही तुम्हारे गुणों को भली-भाँति जान और वर्णित कर सकते हैं। पर कम से कम मुझे तो यह विश्वास है कि परम भगवान् इस जगत में तुम्हारे लिए ही अवतरित हुए हैं। |
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| Look at my ego! Only Krishna can truly know and describe your qualities. But at least I believe that the Supreme Lord has descended into this world for you. |
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