ऐसा प्रतीत होता है कि कृष्ण ने विदुर और भीष्म का बहुत अधिक पक्ष लिया, यहाँ तक कि पांडवों से भी अधिक। लेकिन यहाँ नारद उस लोकप्रिय गलतफहमी को दूर करते हैं। वास्तव में विदुर और भीष्म कृष्ण को इतने प्रिय क्यों थे? कृष्ण उनसे न केवल उनकी अपनी भक्ति सेवा के कारण प्रसन्न थे, जो इतनी असाधारण नहीं थी, बल्कि मुख्य रूप से इसलिए क्योंकि उन्होंने पांडवों की सेवा की, उन्हें दुर्योधन और अन्य शत्रुओं से बचाया। विदुर और भीष्म ने पार्थ के पुत्रों को असहाय होने पर आश्रय और स्नेह देकर प्रभु की नजर में उच्च सम्मान अर्जित किया।
