नारद जी विभिन्न प्रकार के आनंद के लक्षण प्रकट करते हुए उस दिशा में प्रस्थान करने के लिए तैयार होकर उठ खड़े हुए। यह देखकर राजा उग्रसेन बोले।
Narada, displaying various signs of joy, stood up, ready to depart in that direction. Seeing this, King Ugrasena spoke.
तात्पर्य
नारद के हृदय में अनुभव होने वाले बदलते हुए हर्षोल्लास ने उनके शरीर पर बहुत से असर किए- पसीना आना, शरीर का कांपना और शरीर के रोंगटे खड़े हो जाना। यह साफ़ था कि वह सहज प्रेम की भावना से हिल गए थे, इसलिए केवल दिव्य तर्क ही उनके विचारों को बदल सकते थे।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥