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श्री बृहत् भागवतामृत
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खण्ड 1: प्रथम-खण्ड: श्री भगवत कृपा सार निधार
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अध्याय 5: प्रिय (प्रिय भक्त)
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श्लोक 109
श्लोक
1.5.109
यदु-राज भवन्तं स
निषण्णं परमासने
अग्रे सेवक-वत् तिष्ठन्
सम्बोधयति सादरम्
अनुवाद
हे यदुराज! जब आप अपने महान सिंहासन पर बैठते हैं, तो वही हरि आपके सामने सेवक की तरह खड़े होकर आपको आदरपूर्वक संबोधित करते हैं।
O King of Yadu, when you sit on your great throne, the same Hari stands before you like a servant and respectfully addresses you.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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