श्री बृहत् भागवतामृत  »  खण्ड 1: प्रथम-खण्ड: श्री भगवत कृपा सार निधार  »  अध्याय 5: प्रिय (प्रिय भक्त)  »  श्लोक 107
 
 
श्लोक  1.5.107 
महा-राजाधिराजायम्
उग्रसेन महाद्भुतः
महा-सौभाग्य-महिमा
भवतः केन वर्ण्यताम्
 
 
अनुवाद
हे श्रेष्ठ राजाओं के राजा उग्रसेन! आपके अद्भुत महान् सौभाग्य का वर्णन कौन कर सकता है?
 
O Ugrasena, the best of kings, who can describe your wonderful and great fortune?
तात्पर्य
युधिष्ठिर सहित बहुत से अन्य राजा महाराज उग्रसेन के अधीन हैं। कृष्ण ने उन पर जो विशेष अनुग्रह दिखाया है, वह सब देख सकते हैं परन्तु उसका वर्णन समुचित रूप से नहीं किया जा सकता।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)