विचित्र-लीला-भङ्गी च
तथा परम-मोहिनी
मुनीनाम् अप्य् अभिज्ञानां
यया स्यात् परमो भ्रमः
अनुवाद
वे अद्भुत क्रीड़ापूर्ण लीलाएँ इतनी अधिक मनमोहक हैं कि वे आत्मज्ञानी ऋषियों को भी मोह लेती हैं।
Those wonderful playful pastimes are so captivating that they captivate even the self-realized sages.
तात्पर्य
हनुमान श्री कृष्ण और उनके भक्तों को नाराज़ करने के अपने डर को स्वीकार करने जा रहे हैं। वृंदावन के बारे में क्या बोलना, यहाँ तक कि द्वारका में भी, श्री कृष्ण के साथ भक्ति सेवा का मूड, जितना कि हनुमान अभ्यस्त हैं उससे ज्यादा शिथिल है। इसलिए वे भ्रमित होने और कुछ गलत करने के बारे में चिंतित हैं। साथ ही वे आसानी से यह स्वीकार करते हैं कि द्वारका का आकर्षण और वहां श्री कृष्ण की दया की तीव्रता और कहीं नहीं दिखाई गई, यहाँ तक कि अयोध्या में भी नहीं।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥