श्री नारद बोले: अरे, तुम क्या कह रहे हो? अयोध्या में कुछ अदृश्य है? वैकुंठ में भी नहीं! उठो, उठो, मेरे मित्र! हमें तुरन्त वहाँ जाना चाहिए।
Sri Narada said: Hey, what are you saying? Is there anything invisible in Ayodhya? Not even in Vaikuntha! Get up, get up, my friend! We must go there immediately.
तात्पर्य
श्रील सनातन गोस्वामी ने टिप्पणी की कि नारद या तो द्वारका या पाण्डवों की राजधानी हस्तिनापुर जाने के लिए तैयार हैं। दोनों समान रूप से अच्छे गंतव्य हैं। अंतःक्षेप आह के साथ, नारद अयोध्या या वैकुण्ठ में ऐसा वैभव न देखने पर संकट को आवाज देते हैं, और बार-बार अनुरोध उत्तिष्ठ उत्तिष्ठ के साथ वह जाने के लिए अत्यधिक उत्सुकता व्यक्त करते हैं।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥