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श्लोक 1.4.87  |
स्वसृ-दानादि-सख्येन
यः सम्यग् अनुकम्पितः
तेन तस्यार्जुनस्यापि
प्रियो मद्-रूपवान् ध्वजः |
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| अनुवाद |
| भगवान कृष्ण ने अपनी बहन का विवाह पांडव अर्जुन से करके मित्रता का कार्य करके अर्जुन पर पूर्ण कृपा की। और यही कारण है कि अर्जुन अपने रथ की ध्वजा पर मेरी छवि धारण करते हैं। |
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| Lord Krishna bestowed His full grace upon Arjuna by marrying His sister to the Pandava Arjuna, an act of friendship. And this is why Arjuna bears My image on the flag of his chariot. |
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