श्री बृहत् भागवतामृत  »  खण्ड 1: प्रथम-खण्ड: श्री भगवत कृपा सार निधार  »  अध्याय 4: भक्त (भक्त)  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  1.4.8 
वित्रस्तेन ब्रह्मणा प्रार्थितो यः
श्रीमत्-पादाम्भोज-मूले निपत्य
तिष्ठन्न् उत्थाप्योत्तमाङ्गे कराब्जं
धृत्वाङ्गेषु श्री-नृसिंहेन लीढः
 
 
अनुवाद
ब्रह्माजी ने भयभीत होकर आपसे श्री नृसिंह के पास जाने की प्रार्थना की। जब आप भगवान के दिव्य चरणकमलों पर गिर पड़े, तो भगवान उठे और आपको धरती से उठा लिया। उन्होंने अपना करकमल आपके सिर पर रखा और आपके पूरे शरीर को चाटने लगे।
 
Brahma, frightened, begged you to go to Lord Nrisimha. When you fell at the Lord's divine feet, the Lord rose and lifted you from the ground. He placed his lotus hand on your head and began licking your entire body.
तात्पर्य
जब प्रभु नृसिंह स्तम्भ से प्रकट हुए तो हिरण्यकशिपु ने उनके भक्त प्रहलाद को प्रताड़ित किया, इसलिए उन्हें इतना क्रोधित देखा कि ब्रह्माजी को लगा कि प्रभु संपूर्ण ब्रह्मांड को नष्ट करने के लिए तैयार हो सकते हैं। इसलिए ब्रह्माजी ने प्रभु नृसिंह से विनती की कि वो कृपया अपने क्रोध को शांत करें। उनकी प्रार्थना का कोई उत्तर नहीं मिला, तब ब्रह्माजी ने प्रहलाद से मध्यस्थता करने के लिए कहा:

तात प्रशमयोपेही

स्व-पित्रे कुपितम् प्रभुम

"हे मेरे प्यारे पुत्र, प्रभु नृसिंहदेव तुम्हारे राक्षस पिता से अत्यंत क्रोधित हैं। कृपया आगे बढ़ो और प्रभु को प्रसन्न करो।" (भागवतम 7.9.3)

प्रहलाद पूर्ण समर्पण के साथ प्रभु के चरणों में गिर पड़े, लेकिन प्रभु ने उन्हें उठाकर उन पर स्नेह की वर्षा की:

स्व-पाद-मूले पतितम् तम अर्बकम्

विलोक्य देवः कृपया परिप्लुतः

उत्थाप्य तच्छीर्ष्ण्य अधात् करांबुजम्

कालाही-वित्रस्ता-धियाम् कृताबयम्

"जब प्रभु नृसिंहदेव ने देखा कि छोटा बालक प्रहलाद महाराज उनके चरण कमलों में प्रणाम कर रहा है, तब वह अपने भक्त के प्रति स्नेह में अति आनंदित हुए। प्रहलाद को उठाते हुए, प्रभु ने अपने कमल हाथ को बालक के सिर पर रखा क्योंकि उनका हाथ हमेशा अपने सभी भक्तों को निडरता प्रदान करने के लिए तैयार रहता है।" (भागवतम 7.9.5)

इसी प्रकार, बृहान्नारसिंह पुराण में लिखा है, लिलिहे तस्य गात्राणि/ स्व-पोटस्येव केसरी: "प्रभु नृसिंह ने प्रहलाद के अंगों को चाटा जैसे एक साधारण शेरनी अपने शावक को संवारती है।"

 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)