ततः क्षितौ एव निविश्या नाथः
कृत्वा तम् अङ्के स्व-जनैक-बन्धुः
शनैर् विधुन्वन् कर-पल्लवेन
स्पृशन मुहुर् मात्र-वद् आलिलिङ्ग
"भगवान, जो केवल अपने भक्तों के लिए अनुकूल हैं, फिर जमीन पर बैठ गए और प्रह्लाद को अपनी गोद में बिठा लिया। धीरे-धीरे आगे-पीछे हिलते हुए, उन्होंने अपने कमल हाथ से प्रह्लाद को थपथपाया और उन्हें बार-बार गले लगाया जैसे एक माँ अपने बच्चे को गले लगाती है।" इस प्रकार सर्वोच्च प्रभु प्रह्लाद की सेवा में तत्पर रहे, उपस्थित कई अन्य महान व्यक्तियों की उपेक्षा करते हुए।
