श्री बृहत् भागवतामृत  »  खण्ड 1: प्रथम-खण्ड: श्री भगवत कृपा सार निधार  »  अध्याय 4: भक्त (भक्त)  »  श्लोक 65
 
 
श्लोक  1.4.65 
दासः सखा वाहनम् आसनं ध्वज-
च्छत्रं वितानं व्यजनं च वन्दी
मन्त्री भिषग् योध-पतिः सहाय-
श्रेष्ठो महा-कीर्ति-विवर्धनश् च
 
 
अनुवाद
आप प्रभु के सेवक हैं, उनके मित्र हैं, उनके वाहक हैं, उनके आसन हैं, उनकी ध्वजा हैं, उनका छत्र हैं, उनका छत्र हैं, उनका पंखा हैं। आप उनके कवि हैं, उनके सलाहकार हैं, उनके चिकित्सक हैं, उनके सेनापति हैं, उनके सर्वोत्तम सहायक हैं, उनकी अनंत महिमा के विस्तारक हैं।
 
You are the Lord's servant, His friend, His bearer, His seat, His banner, His umbrella, His parasol, His fan. You are His poet, His counselor, His physician, His commander-in-chief, His best helper, the exponent of His infinite glory.
तात्पर्य
यहाँ नारद ने प्रह्लाद द्वारा हनुमान के गौरव का वर्णन संक्षेप में किया है। हनुमान भगवान रामचंद्र की सेवा विभिन्न तरीकों से करते हैं। भगवान के दोस्त के रूप में, उन्हें भगवान के भरोसे और लगाव का आनंद मिलता है। अगर हनुमान के भगवान राम के साथ इस खास रिश्ते को न होता, तो भगवान ने कभी भी उन्हें सीता को अपना संदेश और अपनी अंगूठी देने के लिए लंका नहीं भेजा होता। एक जंगी झंडे की तरह, हनुमान हमेशा भगवान के पास खड़े रहते थे। वे इतने लंबे थे कि सभी उन्हें बहुत दूर से भी देख सकते थे। हनुमान को पहले दूर से देखकर कोई भी जान सकता था कि भगवान रामचंद्र मौजूद हैं। और जब हनुमान ने भगवान के वाहन के रूप में सेवा की, तो उनकी ताकतवर पूँछ झंडे के पीछे लहराती दिखाई दी। वही पूँछ शाही छत्र, धूप से बचने के लिए छतरी और पंखे का काम भी करती थी। भगवान के कवि की भूमिका में, हनुमान ने भगवान के गौरव को उनकी खुशी के लिए गाया। कभी-कभी हनुमान चिकित्सीय सेवाएँ भी देते थे, युद्ध के मैदान में भगवान के घाव भरते थे। इस तरह, हनुमान भगवान राम के सभी बंदर सहायकों में सबसे कुशल थे।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)