श्री बृहत् भागवतामृत  »  खण्ड 1: प्रथम-खण्ड: श्री भगवत कृपा सार निधार  »  अध्याय 4: भक्त (भक्त)  »  श्लोक 59
 
 
श्लोक  1.4.59 
निजेष्ट-स्वामिनो नाम-
कीर्तन-श्रुति-हर्षितः
उत्प्लुत्य हनूमान् दूरात्
कण्ठे जग्राह नारदम्
 
 
अनुवाद
अपने आराध्य भगवान का नाम सुनकर प्रसन्न होकर हनुमान जी अपनी जगह से उछल पड़े और नारद जी का गला पकड़ लिया।
 
Delighted by hearing the name of his beloved God, Hanuman ji jumped from his place and caught hold of Narada ji's neck.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)