विचित्रैर् दिव्य-दिव्यैश् च
गद्य-पद्यैः स्व-निर्मितैः
स्तुतिम् अन्यैश् च कुर्वाणं
दण्डवत्-प्रणतीर् अपि
अनुवाद
उन्होंने गद्य और पद्य में रचित, अपनी स्वयं की अत्यंत उत्कृष्ट प्रार्थनाओं से प्रभु की स्तुति की। उन्होंने दूसरों द्वारा रचित प्रार्थनाएँ भी पढ़ीं। और उन्होंने बार-बार साष्टांग प्रणाम किया।
He praised the Lord with his own exquisite prayers, composed in prose and verse. He also recited prayers composed by others. And he prostrated himself repeatedly.
तात्पर्य
हनुमान की कुछ प्रार्थनाएं स्वयं की रचनाएं थीं, जबकि कुछ उन्होंने पुराणों और अन्य धर्मग्रंथों से उधार ली थीं।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥