गन्धर्वादिभिर् आनन्दाद्
गीयमानं रसायनम्
रामायणं च शृण्वन्तं
कम्पाश्रु-पुलकाचितम्
अनुवाद
गंधर्वों और अन्य दिव्य गायकों द्वारा सुनाई गई अमृतमय रामायण सुनकर हनुमानजी आनंद में डूब गए। उनके अंग काँपने लगे, आँखों से आँसू बहने लगे और शरीर के रोंगटे खड़े हो गए।
Hanumanji was overwhelmed with joy as he listened to the divine Ramayana, recited by the Gandharvas and other divine singers. His limbs trembled, his eyes filled with tears, and his hair stood on end.
तात्पर्य
प्रेम की परिपक्व चेतना में प्रभु के गुणों के परिपक्व श्रवण से ये शारीरिक विह्वलताएँ स्वाभाविक परिणाम हैं। किंपुरुष-लोक में निवास करने वाले गंधर्व नियमित रूप से श्री रामायण से प्रभु रामचंद्र के गुणों का गुणगान करते थे जिसे हनुमान और उनके रसिक सहयोगियों के लिए रसायन की तरह था। नौ प्रकार के प्रेममय संबंध की आनंदपूर्ण अनुभूति से भरा एक भंडार। अथवा रसायन का दूसरा अर्थ लेते हुए, ये प्रभु का गुणगान एक स्वादिष्ट औषधि की तरह था जो भौतिक अस्तित्व के रोग के उपचार और प्रेम-भक्ति के स्वाभाविक जीवन क्रिया को मजबूत करने में सबसे प्रभावशाली है।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥