श्री बृहत् भागवतामृत  »  खण्ड 1: प्रथम-खण्ड: श्री भगवत कृपा सार निधार  »  अध्याय 4: भक्त (भक्त)  »  श्लोक 54
 
 
श्लोक  1.4.54 
श्री-परीक्षिद् उवाच
अये मातर् अहो भद्रम्
अहो भद्रम् इति ब्रुवन्
उत्पत्यासनतः खेन
मुनिः किम्पुरुषं गतः
 
 
अनुवाद
श्री परीक्षित बोले: हे माता! तब नारद मुनि अपने आसन से उछल पड़े और आकाश मार्ग से किम्पुरुष वर्ष की ओर उड़ चले और बार-बार यही कहते रहे, "कितना अद्भुत! कितना अद्भुत!"
 
Shri Parikshit said: O Mother! Then Narada Muni jumped from his seat and flew through the sky towards Kimpurusha Varsha and kept saying again and again, "How wonderful! How wonderful!"
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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