किंपुरुषे वर्षे भगवंतम् आदि-पुरुषं लक्ष्मणांग्रजं सीताबिरामं रामं तच्चरण-सन्निकर्षाभिरतः परम भागवतो हनुमान् सह किंपुरुषैरविरत भक्तिरुपास्ते। ऋषिषेणेन सह गंधर्वैरनुगीयमानं परम-कल्याणीं भर्तृ भगवत-कथां समुपश्रृणोति स्वयं चेदं गायति।
"हे राजन, किंपुरुष वर्ष में महान भक्त हनुमान हमेशा वहाँ के निवासियों के साथ श्री रामचन्द्र जी की, जो लक्ष्मण के बड़े भाई और सीतादेवी के प्रियतम हैं, भक्तिपूर्वक आराधना में लगे रहते हैं। अनेक गंधर्व हमेशा श्री रामचन्द्र जी के यश का गान करने में लगे रहते हैं। वह कीर्तन सदैव अत्यंत मंगलकारी होता है। हनुमान जी और किंपुरुष वर्ष के प्रमुख व्यक्ति ऋषभसेन सदा उन यशों को पूर्ण ध्यान से सुनते रहते हैं। हनुमान जी विभिन्न मंत्रों का जाप किया करते हैं।"
