आजकल लोग अपनी पसंद के किसी भी रंग की छत्री लेने की स्वतंत्रता लेते हैं, लेकिन परंपरागत रूप से केवल राजाओं को ही सफेद छत्री का उपयोग करने की अनुमति थी। जंगल में जहां निर्मित छतरियां उपलब्ध नहीं थीं, वहां भगवान रामचंद्र को राजत्व के इस प्रतीक से लैस करने के लिए, हनुमान ने अपनी सफेद पूंछ प्रदान की। लंका तक पुल बनाने में हनुमान ने प्रमुख भूमिका निभाई और उन्होंने सबसे बड़े पत्थरों को उछालकर बंदर श्रमिक दल को प्रेरित किया।
