श्री बृहत् भागवतामृत  »  खण्ड 1: प्रथम-खण्ड: श्री भगवत कृपा सार निधार  »  अध्याय 4: भक्त (भक्त)  »  श्लोक 43
 
 
श्लोक  1.4.43 
हेला-विलङ्घितागाध-
शत-योजन-सागरः
रक्षो-राज-पुर-स्थार्त-
सीताश्वासन-कोविदः
 
 
अनुवाद
उन्होंने चंचलतापूर्वक हजारों मील अथाह सागर को पार कर लिया। राक्षसराज की राजधानी में, उन्होंने माता सीता को उनके दुःख में बड़ी कुशलता से सांत्वना दी।
 
He glided across thousands of miles of vast ocean with agility. In the capital of the demon king, he skillfully consoled Mother Sita in her grief.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)