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श्लोक 1.4.36  |
भवताद् भवतः प्रसादतो
भगवत्-स्नेह-विजृम्भितः किल
मम तन्-महिमा तथाप्य् अणुर्
नव-भक्तेषु कृपा-भरेक्षया |
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| अनुवाद |
| हम कह सकते हैं कि आपकी कृपा से परम प्रभु ने मुझ पर कुछ प्रेम किया है और इसलिए मैं महिमावान प्रतीत होता हूँ। परन्तु मेरी महानता, प्रभु द्वारा अपने नए भक्तों पर बरसाई गई असीम कृपा के सामने एक छोटे से कण के समान है। |
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| We can say that through your grace the Supreme Lord has bestowed some love upon me, and therefore I appear glorious. But my greatness is like a tiny speck compared to the boundless grace the Lord has showered upon His new devotees. |
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