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श्री बृहत् भागवतामृत
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खण्ड 1: प्रथम-खण्ड: श्री भगवत कृपा सार निधार
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अध्याय 4: भक्त (भक्त)
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श्लोक 114
श्लोक
1.4.114
त्रै-लोक्य-व्यापकं स्वच्छं
यशश् च विषयाः परे
सुराणां स्पृहणीया ये
सर्व-दोष-विवर्जिताः
अनुवाद
उनकी पवित्र कीर्ति तीनों लोकों में विख्यात है। उनकी दोषरहित संपत्ति देवताओं में ईर्ष्या उत्पन्न करती है।
His holy fame is renowned throughout the three worlds. His flawless wealth arouses the envy of the gods.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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