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श्लोक 1.4.114  |
त्रै-लोक्य-व्यापकं स्वच्छं
यशश् च विषयाः परे
सुराणां स्पृहणीया ये
सर्व-दोष-विवर्जिताः |
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| अनुवाद |
| उनकी पवित्र कीर्ति तीनों लोकों में विख्यात है। उनकी दोषरहित संपत्ति देवताओं में ईर्ष्या उत्पन्न करती है। |
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| His holy fame is renowned throughout the three worlds. His flawless wealth arouses the envy of the gods. |
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