श्री बृहत् भागवतामृत  »  खण्ड 1: प्रथम-खण्ड: श्री भगवत कृपा सार निधार  »  अध्याय 4: भक्त (भक्त)  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  1.4.11 
यः पीत-वासो-’ङ्घ्रि-सरोज-दृष्ट्यै
गच्छन् वनं नैमिषकं कदाचित्
नारायणेनाहव-तोषितेन
प्रोक्तस् त्वया हन्त सदा जितो ’स्मि
 
 
अनुवाद
एक बार आप नारायण के दर्शन करने नैमिष वन गए, जिन्हें "पीत वस्त्रधारी भगवान" कहा जाता है। रास्ते में आपने युद्ध में भगवान को प्रसन्न किया, और उन्होंने आपसे कहा, "हाँ, मैं सदैव तुमसे पराजित हूँ!"
 
Once you went to the Naimisha forest to visit Narayana, who is called "the Lord in Yellow Cloths." On the way, you appeased the Lord in battle, and he said to you, "Yes, I am always defeated by you!"
तात्पर्य
इस घटना का वर्णन कई ग्रन्थों में मिलता है, जिसमें वामन पुराण (7) भी शामिल है। एक बार प्रह्लाद भगवान पीतांबर (ईश्वर का सुंदर रूप) से मिलने नैमिषारण्य गए। रास्ते में उन्हें एक अजीब व्यक्ति मिला जो संन्यासी की धोती पहने हुए था लेकिन उसके हाथ में योद्धा का धनुष-बाण था। प्रह्लाद ने उस व्यक्ति के विरोधाभासी पहनावे से यह अनुमान लगाया कि वह कोई ढोंगी होगा जो धर्म के सच्चे सिद्धांतों का दुरुपयोग कर रहा है। इसलिए प्रह्लाद ने संन्यासी के साथ युद्ध शुरू कर दिया और प्रतिज्ञा की, "मैं कसम खाता हूँ कि मैं तुम्हें हराऊँगा!" लेकिन कई दिनों तक द्वंद्वयुद्ध करने के बाद भी प्रह्लाद उस शत्रु को वश में नहीं कर सका। सुबह होते ही युद्ध शुरू करने से पहले, प्रह्लाद ने अपनी व्यक्तिगत देवता की पूजा की। फिर उन्होंने देखा कि उनका प्रतिद्वंद्वी उनके पास खड़ा है और उसने अपनी नैवेद्य के फूलों की माला पहनी हुई है। प्रह्लाद को अचानक एहसास हुआ कि वह अजनबी भगवान पीतांबर थे, जो स्वयं नारायण थे। इसके बाद प्रह्लाद ने अपनी पूरी योग्यता के साथ उस प्रतिद्वंद्वी की प्रार्थना करके उन्हें संतुष्ट करने की कोशिश की। जवाब में, भगवान ने उन्हें अपने कमल के हाथ से स्पर्श किया, जिससे प्रह्लाद को लड़ने की थकान और सभी चिंता से मुक्ति मिल गई। प्रह्लाद ने भगवान पीताम्बर से पूछा कि एक क्षत्रिय के कर्तव्य का उल्लंघन करने के लिए क्या किया जाए - अर्थात् अपने प्रतिद्वंद्वी को हराने का वादा किया और उसे पूरा नहीं किया। प्रह्लाद के साथ युद्ध के खेल से पूरी तरह संतुष्ट भगवान ने उससे कहा, "लेकिन मैं हमेशा तुमसे हार जाता हूँ!"
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)