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श्लोक 1.3.9  |
जगद्-ईशत्व-माहात्म्य-
प्रकाशन-परैः स्तवैः
अस्तौद् विवृत्य तस्मिंश् च
जगौ कृष्ण-कृपा-भरम् |
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| अनुवाद |
| इसके बाद नारद जी ने भगवान शिव की स्तुति करते हुए प्रार्थना की, जिसमें उन्होंने ब्रह्माण्ड के सर्वोच्च नियन्ता के रूप में उनकी स्तुति की तथा भगवान कृष्ण द्वारा शिव पर की गई कृपा की पूर्णता का विस्तारपूर्वक बखान किया। |
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| Narada then offered a prayer praising Lord Shiva, praising him as the supreme controller of the universe and describing in detail the perfection of Lord Krishna's grace bestowed upon Shiva. |
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