श्री बृहत् भागवतामृत  »  खण्ड 1: प्रथम-खण्ड: श्री भगवत कृपा सार निधार  »  अध्याय 3: प्रपञ्चातीत (भौतिकता से परे)  »  श्लोक 80
 
 
श्लोक  1.3.80 
तस्य सौभाग्यम् अस्माभिः
सर्वैर् लक्ष्म्याप्य् अनुत्तमम्
साक्षाद् धिरण्यकशिपोर्
अनुभूतं विदारणे
 
 
अनुवाद
जब भगवान ने हिरण्यकशिपु को चीर डाला, तब मैंने, समस्त देवताओं ने तथा देवी लक्ष्मी ने प्रह्लाद के अतुलनीय सौभाग्य को अपनी आँखों से देखा।
 
When the Lord tore apart Hiranyakashipu, I, all the gods and Goddess Lakshmi witnessed with our own eyes the incomparable good fortune of Prahlada.
तात्पर्य
प्रभु शिव, ब्रह्मा और कई अन्य देवता और भक्त, लक्ष्मीदेवी और गरुड़ के नेतृत्व में, हिरण्यकशिपु को प्रभु नृसिंह द्वारा मारते हुए देखे। प्रह्लाद के लिए भगवान की विशेष दया के इस तरह के पर्याप्त प्रत्यक्ष प्रमाण के साथ, किसी को यह नहीं सोचना चाहिए कि राक्षसों के परिवार में प्रह्लाद का जन्म उन्हें वैष्णव बनने के लिए अयोग्य घोषित करता है। प्रह्लाद की खातिर भगवान के प्रकट होने का वर्णन श्रीमद-भागवतम, सातवें स्कंद, आठवें अध्याय में किया गया है।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)