श्री बृहत् भागवतामृत  »  खण्ड 1: प्रथम-खण्ड: श्री भगवत कृपा सार निधार  »  अध्याय 3: प्रपञ्चातीत (भौतिकता से परे)  »  श्लोक 73
 
 
श्लोक  1.3.73 
सम्पूर्णा परिपूर्णस्य
लक्ष्मीर् भगवतः सदा
निषेवते पदाम्भोजे
श्री-कृष्णस्यैव रुक्मिणी
 
 
अनुवाद
रुक्मिणी पूर्ण पुरुषोत्तम भगवान की पूर्ण दिव्य पत्नी हैं। वे सदैव श्रीकृष्ण के चरणकमलों की सेवा करती हैं।
 
Rukmini is the perfect transcendental wife of the Supreme Personality of Godhead. She always serves the lotus feet of Lord Krishna.
तात्पर्य
क्योंकि श्री कृष्ण विष्णु के केवल अवतार नहीं है अपितु सभी अवतारों के स्त्रोत हैं, इसलिए श्रीमती रुक्मिणी भी उतनी ही परम हैं। वे सभी भाग्यशाली देवियों के स्त्रोत हैं।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)