रुक्मिणी सा महा-लक्ष्मीः
कृष्णस् तु भगवान् स्वयम्
तस्या अंशावतारा हि
वामनादि-समीपतः
अनुवाद
महारानी रुक्मिणी स्वयं परम सौभाग्य की देवी हैं, और कृष्ण आदि भगवान हैं। रुक्मिणी के अंशावतार भगवान वामन और उनके अन्य अवतारों के साथ होते हैं।
Queen Rukmini herself is the goddess of supreme good fortune, and Krishna is the primordial Lord. Rukmini's partial incarnations accompany Lord Vamana and his other incarnations.
तात्पर्य
अगर नारद को इस बात पर कोई शक है कि देवी महा-लक्ष्मी, श्री कृष्ण के साथ आती हैं, तो भगवान् शिव नारद को याद दिलाते हैं कि उनका अवतरण राजा भीष्मक की बेटी के रूप में हुआ है। फिर भी, नारद को यह शक हो सकता है कि श्री महा-लक्ष्मी कभी भी भगवान् नारायण का साथ नहीं छोड़ती हैं। भगवान् शिव इसकी पुष्टि करते हुए भागवत (1.3.28) में कहे गये वाक्य का उद्धरण देते हैं 'कृष्णस्तु भगवान् स्वयं' : धरती पर जिस रूप में कृष्ण आते हैं, वे स्वयं भगवान् के मूल व्यक्तित्व हैं। लेकिन इसके बाद भी कुछ बार लक्ष्मी को भगवान् के अवतारों जैसे कि श्री वामन, सहस्त्रमुख वाले महापुरुष और कपिलदेव के साथ देखा जाता है? क्योंकि ये लक्ष्मी महा-लक्ष्मी के अवतार हैं। भाग्य की वो मूल देवी, जो वैकुण्ठ में भगवान् की सबसे प्रिय भक्त हैं, वो रानी रुक्मिणी के रूप में द्वारका में आईं हैं।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥