श्री बृहत् भागवतामृत  »  खण्ड 1: प्रथम-खण्ड: श्री भगवत कृपा सार निधार  »  अध्याय 3: प्रपञ्चातीत (भौतिकता से परे)  »  श्लोक 69
 
 
श्लोक  1.3.69 
जय वैकुण्ठ-लोकेति
तत्रत्या जयतेति च
जय कृष्ण-प्रिये पद्मे
वैकुण्ठाधीश्वरीत्य् अपि
 
 
अनुवाद
"हे वैकुंठ लोक, आपकी जय हो! वहाँ रहने वाले सभी लोगों की जय हो! और आपकी जय हो, हे पद्मा, भगवान कृष्ण की प्रियतमा, हे वैकुंठ की अधिष्ठात्री देवी!"
 
"Victory to you, O Vaikuntha planet! Victory to all who dwell there! And victory to you, O Padma, beloved of Lord Krishna, O presiding deity of Vaikuntha!"
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd