श्री बृहत् भागवतामृत  »  खण्ड 1: प्रथम-खण्ड: श्री भगवत कृपा सार निधार  »  अध्याय 3: प्रपञ्चातीत (भौतिकता से परे)  »  श्लोक 67
 
 
श्लोक  1.3.67 
करोति वसतिं नित्यं
या रम्ये तस्य वक्षसि
पति-व्रतोत्तमाशेषा-
वतारेष्व् अनुयात्य् अमुम्
 
 
अनुवाद
यह परम पतिव्रता स्त्री सदैव उनकी सुन्दर छाती पर निवास करती है तथा उनके सभी अवतारों में उनका अनुसरण करती है।
 
This supremely devoted wife always resides on His beautiful chest and follows Him in all His incarnations.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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