“हे प्रभु, हम नहीं जानते कि सर्प कालिया ने आपके चरणों की धूल से छूने का यह महान अवसर कैसे प्राप्त किया। इसी उद्देश्य के लिए, भाग्य की देवी ने सदियों तक तपस्या की, अन्य सभी इच्छाओं को त्याग दिया और कठोर व्रत लिए।" (भागवतम 10.16.36)
सर्वोच्च देवी महा-लक्ष्मी वैकुंठ के भगवान की शाश्वत प्यारी है; उसे उसे प्राप्त करने के लिए उसकी पूजा करने की आवश्यकता नहीं है। परन्तु उसके विस्तार नारायण के विभिन्न अवतारों के साथ उसके साथ रहने के लिए अवतार बनाते हैं, और महा-लक्ष्मी के इन अवतारों में से कुछ, जैसे कि भृगु मुनि की पुत्री, को वेद शास्त्रों में अपने पति के रूप में भगवान को प्राप्त करने के लिए तपस्या करने के लिए वर्णित किया गया है।
