श्री बृहत् भागवतामृत  »  खण्ड 1: प्रथम-खण्ड: श्री भगवत कृपा सार निधार  »  अध्याय 3: प्रपञ्चातीत (भौतिकता से परे)  »  श्लोक 59
 
 
श्लोक  1.3.59 
भगवान् इव सत्यं मे
त एव परम-प्रियाः
परम-प्रार्थनीयश् च
मम तैः सह सङ्गमः
 
 
अनुवाद
मैं तुमसे सत्य कहता हूँ, ऐसे भक्त मुझे भगवान के समान ही असीम प्रिय हैं। मेरी परम अभिलाषा उनका सान्निध्य पाना है।
 
I tell you the truth, such devotees are as dear to me as the Lord Himself. My greatest desire is to attain their proximity.
तात्पर्य
भगवान शिव महादेवजी को नन्दीश्वर सहित अपने सहयोगियों से भी श्रेष्ठ वैष्णवों का अधिक सम्मान था, जैसा कि भगवान शिव ने दस प्रचेता भाइयों से कहा था:

अथ भागवता यूयं

प्रियाः स्थ भगवान् यथा

न मद् भागवतानां च

प्रेयान अन्योऽस्ति कर्हिचित

"तुम सभी प्रभु के भक्त हो, और इसलिए मैं इस बात की सराहना करता हूँ कि तुम परमेश्वर के समान ही आदरणीय हो। मैं जानता हूँ कि भक्त भी इस तरह से मेरा सम्मान करते हैं और मैं उन्हें प्रिय हूँ। इस प्रकार कोई भी भक्तों को उतना प्रिय नहीं हो सकता जितना कि मैं हूँ।" (भागवतम् 4.24.30)

 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)