श्री बृहत् भागवतामृत  »  खण्ड 1: प्रथम-खण्ड: श्री भगवत कृपा सार निधार  »  अध्याय 3: प्रपञ्चातीत (भौतिकता से परे)  »  श्लोक 49
 
 
श्लोक  1.3.49 
अहो कारुण्य-महिमा
श्री-कृष्णस्य कुतो ’न्यतः
वैकुण्ठ-लोके यो ’जस्रं
तदीयेषु च राजते
 
 
अनुवाद
अहा, वैकुण्ठ लोक के निवासियों पर श्रीकृष्ण ने जो करुणा निरंतर बरसाई, वैसी करुणा और कहाँ देखी जा सकती है?
 
Ah, where else can one see the compassion that Sri Krishna constantly showered on the inhabitants of Vaikuntha?
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)