श्री बृहत् भागवतामृत  »  खण्ड 1: प्रथम-खण्ड: श्री भगवत कृपा सार निधार  »  अध्याय 3: प्रपञ्चातीत (भौतिकता से परे)  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  1.3.11 
श्री-रुद्र उवाच
न जातु जगद्-ईशो ’हं
नापि कृष्ण-कृपास्पदम्
परं तद्-दास-दासानां
सदानुग्रह-कामुकः
 
 
अनुवाद
श्री रुद्र ने कहा: "मैं न तो ब्रह्माण्ड का स्वामी हूँ, न ही कृष्ण की कृपा का पात्र! मैं तो बस एक बेचारा जीव हूँ जो सदैव उनके सेवकों के सेवकों की कृपा की कामना करता रहता है।"
 
Sri Rudra said: "I am neither the Lord of the universe nor the recipient of Krishna's mercy! I am just a poor creature who always seeks the mercy of the servants of His servants."
तात्पर्य
"मैं तो केवल कृष्ण के दासों की कृपा के लिए ही लालायित रह सकता हूँ, क्योंकि मैं इसे पाने के लिए पर्याप्त सौभाग्यशाली नहीं हूँ।"
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)