श्री बृहत् भागवतामृत  »  खण्ड 1: प्रथम-खण्ड: श्री भगवत कृपा सार निधार  »  अध्याय 3: प्रपञ्चातीत (भौतिकता से परे)  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  1.3.10 
कर्णौ पिधाय रुद्रो ’सौ
स-क्रोधम् अवदद् भृशम्
सर्व-वैष्णव-मूर्धन्यो
विष्णु-भक्ति-प्रवर्तकः
 
 
अनुवाद
वैष्णवों में श्रेष्ठ भगवान रुद्र, विष्णु भक्ति के प्रवर्तक, ने तुरन्त अपने कान बंद कर लिए और क्रोधित होकर उत्तर दिया।
 
Lord Rudra, the best among the Vaishnavas, the originator of Vishnu devotion, immediately closed his ears and replied angrily.
तात्पर्य
वैष्णवानां महेश्वरः: "सभी वैष्णवों में भगवान महेश्वर सर्वोपरि हैं।" वे सबसे महान वैष्णव हैं क्योंकि वे विशुद्ध भक्तिमय सेवा की शिक्षा की शुरुआत करते हैं। उन्होंने वैष्णव सम्प्रदाय के चार प्रामाणिक स्कूलों में से एक, रुद्र-सम्प्रदाय की स्थापना की। वह विष्णु के अवतार के बजाय एक वैष्णव के रूप में अधिक प्रसिद्ध हैं।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)