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श्लोक 1.2.96  |
अथ वायु-पुराणस्य
मतम् एतद् ब्रवीम्य् अहम्
श्री-महादेव-लोकस् तु
सप्तावरणतो बहिः |
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| अनुवाद |
| अब मैं तुम्हें वायु पुराण का मत बताता हूँ: श्री महादेव का निवास ब्रह्माण्ड के सात आवरणों के बाहर है। |
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| Now I will tell you the opinion of Vayu Purana: The abode of Shri Mahadev is outside the seven coverings of the universe. |
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