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श्लोक 1.2.86  |
कृष्णाच् छिवस्य भेदेक्षा
महा-दोष-करी मता
आगो भगवता स्वस्मिन्
क्षम्यते न शिवे कृतम् |
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| अनुवाद |
| भगवान शिव को कृष्ण से भिन्न मानना एक गंभीर आध्यात्मिक विचलन है। भगवान स्वयं के विरुद्ध अपराध सहन कर लेते हैं, किन्तु भगवान शिव के विरुद्ध नहीं। |
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| To consider Lord Shiva different from Krishna is a serious spiritual deviation. God tolerates offenses against himself, but not against Lord Shiva. |
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