श्री बृहत् भागवतामृत  »  खण्ड 1: प्रथम-खण्ड: श्री भगवत कृपा सार निधार  »  अध्याय 2: दिव्य (दैवीय स्तर)  »  श्लोक 59
 
 
श्लोक  1.2.59 
तस्या एव वयं सर्वे
’प्य् अधीना मोहितास् तया
तन् न कृष्ण-कृपा-लेशस्य्-
आपि पात्रम् अवेहि माम्
 
 
अनुवाद
हम सब उसके अधीन और मोहग्रस्त हैं। इसलिए आप मुझे कृष्ण की लेशमात्र भी कृपा का पात्र न समझें।
 
We are all under his control and enamored. Therefore, do not consider me worthy of even the slightest of Krishna's grace.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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