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श्लोक 1.2.52  |
परमान्वेषणायासैर्
यस्योद्देशो ’पि न त्वया
पुरा प्राप्तः परं दृष्टस्
तपोभिर् हृदि यः क्षणम् |
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| अनुवाद |
| यद्यपि सुदूर अतीत में आपने अनेक प्रयास किये तथा उन्हें पाने में असफल रहे, फिर भी तपस्या करने के पश्चात अंततः आपने उन्हें अपने हृदय में क्षण भर के लिए देखा। |
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| Although in the distant past you made many attempts and failed to attain Him, yet after performing austerities you finally saw Him for a moment in your heart. |
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