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श्री बृहत् भागवतामृत
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खण्ड 1: प्रथम-खण्ड: श्री भगवत कृपा सार निधार
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अध्याय 2: दिव्य (दैवीय स्तर)
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श्लोक 47
श्लोक
1.2.47
एकः सृजति पात्य् अत्ति
भुवनानि चतुर्दश
ब्रह्माण्डस्येश्वरो नित्यं
स्वयम्-भूर् यश् च कथ्यते
अनुवाद
आप ही चौदह लोकों की रचना, पालन और भक्षण करते हैं। आप ही सदा ब्रह्माण्ड पर शासन करते हैं और स्वयंभू कहलाते हैं।
You alone create, sustain, and consume the fourteen worlds. You alone eternally rule the universe and are called Svayambhu.
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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