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श्लोक 1.2.41  |
पद्म-योनेः प्रहर्षार्थं
द्रव्य-जातं निवेदितम्
सहस्र-पाणिभिर् वक्त्र-
सहस्रेष्व् अर्पयन्न् अदन् |
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| अनुवाद |
| कमलवत ब्रह्मा को उत्साहित करने के लिए भगवान ने उन्हें अर्पित की गई सभी वस्तुओं को अपने हजार हाथों से अपने हजार मुखों में डालकर खा लिया। |
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| To appease the lotus-like Brahma, the Lord ate all the things offered to him by putting them into his thousand mouths with his thousand hands. |
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